करोपानी में किसानों का आमरण अनशन टूटा, हाईकोर्ट जाने की तैयारी अधिवक्ता आराधना भार्गव ने पिलाया जूस
आमला। पुश्तैनी जमीन से बेदखली और सीमांकन को लेकर करोपानी में चल रहा किसानों का आमरण अनशन एवं भूख हड़ताल शुक्रवार को किसान संघर्ष समिति की प्रदेश अध्यक्ष एवं एडवोकेट आराधना भार्गव के हस्तक्षेप के बाद समाप्त हो गया। समिति का आरोप है कि 16 सितंबर को प्रशासन और पुलिस की मौजूदगी में किसानों को उनकी भूमि से बेदखल किया गया तथा खेत में खड़ी गन्ने की फसल को भी नुकसान पहुंचा। आंदोलनकारी किसानों का कहना है कि भूमि पर उनका परिवार लंबे समय से काबिज होकर खेती करता आ रहा है।
सात दिन तक चला आंदोलन, प्रशासन पर अनदेखी का आरोप
किसान संघर्ष समिति के अनुसार पीड़ित परिवार अपने अधिकार और न्याय की मांग को लेकर सात दिनों तक आमरण अनशन एवं भूख हड़ताल पर डटा रहा। समिति का आरोप है कि इस दौरान प्रशासन ने किसानों की समस्याओं का समाधान करने के लिए अपेक्षित पहल नहीं की। तहसील अध्यक्ष दिनेश कुमार यदुवंशी भी आंदोलन स्थल पर मौजूद रहे। समिति ने आरोप लगाया कि बेदखली के दौरान भारी पुलिस बल और प्रशासनिक अमले की मौजूदगी रही। किसानों का कहना है कि कार्रवाई से उनकी आजीविका प्रभावित हुई है।
पुराने राजस्व रिकॉर्ड और सीमांकन पर उठाए सवाल
समिति ने दावा किया कि वर्ष 1911-12 के राजस्व रिकॉर्ड में किसानों के पूर्वजों के नाम दर्ज हैं। वहीं 15 दिसंबर 2025 के सीमांकन में कब्जे संबंधी विवरण में काट-छांट किए जाने का आरोप लगाया गया है। समिति ने पूर्व में दर्ज आपराधिक प्रकरणों का भी उल्लेख किया। इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। प्रशासन का पक्ष इस खबर में उपलब्ध नहीं है।
आराधना भार्गव बोलीं- हाईकोर्ट में चुनौती देंगे
एडवोकेट आराधना भार्गव आंदोलन स्थल पहुंचीं और अनशनकारियों को जूस पिलाकर अनशन समाप्त कराया। उन्होंने समिति के अनुसार कहा कि बेदखली आदेश, सीमांकन रिपोर्ट और कार्रवाई को हाईकोर्ट में चुनौती दी जाएगी। उन्होंने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का हवाला देते हुए पुलिस बल से कब्जा दिलाने की कार्रवाई पर भी सवाल उठाए। समिति ने कहा कि किसानों को न्याय दिलाने के लिए कानूनी लड़ाई आगे जारी रहेगी।
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