तहसील न्यायालय में फाइल फाड़ने के कथित मामले में पूर्व सैनिक दोषमुक्त आठ गवाह और दस्तावेजी साक्ष्य पेश किए, आरोप संदेह से परे सिद्ध नहीं हो सके
आमला। 25 मार्च 2022 को तहसील न्यायालय में न्यायालयीन कार्यवाही के दौरान पूर्व सैनिक संजू यादव पर तहसीलदार को कथित धमकी देने, फाइल उठाकर फाड़ने और न्यायालयीन कार्य में बाधा डालने के आरोप में आमला पुलिस ने धारा 294, 353, 332 एवं 506 भाग-2 के तहत प्रकरण दर्ज किया था। अभियोजन के अनुसार घटना के दौरान तहसील कर्मचारी, पुलिसकर्मी और अधिवक्ता मौके पर मौजूद थे। मामले की सुनवाई के दौरान अभियोजन की ओर से आठ गवाहों के बयान कराए गए और दस्तावेजी साक्ष्य प्रस्तुत किए ग
गवाहों के बयानों में सामने आए विरोधाभास, मारपीट की पुष्टि नहीं
बचाव पक्ष के अधिवक्ता राजेंद्र उपाध्याय ने अभियोजन के साक्ष्यों में मौजूद विरोधाभासों और कमियों की ओर न्यायालय का ध्यान आकर्षित किया। तहसीलदार ने अपने बयान में कहा कि उनके साथ कोई मारपीट नहीं हुई थी। वहीं लिखित रिपोर्ट में अधीनस्थ कर्मचारी के साथ मारपीट का उल्लेख था, लेकिन संबंधित कर्मचारी ने न्यायालय में न तो मारपीट की पुष्टि की और न ही घटना के समय अपनी मौजूदगी का समर्थन किया। अन्य कथित चश्मदीद गवाहों के बयान भी अभियोजन की कहानी का पूर्ण समर्थन नहीं कर सके। विवेचक हेमंत कुमार पांडे से हुई पूछताछ में भी बचाव पक्ष द्वारा उठाए गए बिंदुओं पर संतोषजनक स्पष्टीकरण सामने नहीं आया।
न्यायालय ने कहा- आरोप संदेह से परे प्रमाणित नहीं, संजू यादव दोषमुक्त
मामले की पृष्ठभूमि में संजू यादव द्वारा अपने ग्राम में कथित अवैध अतिक्रमण को लेकर की जा रही शिकायतें थीं। बचाव पक्ष ने न्यायालय के समक्ष कहा कि संजू यादव अपनी शिकायतों और कथित दुर्व्यवहार के संबंध में अपनी बात रख रहा था। उसकी ओर से की गई शिकायतों के दस्तावेज भी प्रस्तुत किए गए। न्यायालय ने तहसीलदार, अभियोजन के अन्य गवाहों और विवेचक के बयानों सहित प्रस्तुत दस्तावेजों का परीक्षण किया। इसके बाद न्यायालय ने निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन आरोपी के विरुद्ध लगाए गए आरोपों को संदेह से परे प्रमाणित नहीं कर सका। आपराधिक प्रकरण में आरोप सिद्ध नहीं होने के आधार पर न्यायालय ने पूर्व सैनिक संजू यादव को आरोपों से दोषमुक्त कर दिया।
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