पुलिस को नहीं दिखाई देते नेताओं के ओवरलोड डंपर, बिना रॉयल्टी हो रहा परिवहन मिलीभगत के आरोप
मिलीभगत के चलते बेखौफ दौड़ रहे ओवरलोड डंप
आमला क्षेत्र में इन दिनों ओवरलोड डंपरों का संचालन खुलेआम जारी है, लेकिन जिम्मेदार विभाग इस ओर आंखें मूंदे हुए हैं। स्थानीय लोगों का आरोप है कि नेताओं से जुड़े डंपरों को न तो रोका जाता है और न ही उनकी जांच होती है। बिना रॉयल्टी के खनिज परिवहन लगातार जारी है, जिससे शासन को भारी राजस्व का नुकसान हो रहा है। वहीं आम वाहन चालकों पर सख्ती दिखाने वाली पुलिस इन डंपरों के सामने लाचार नजर आती है। देर रात से लेकर सुबह तक सड़कों पर ओवरलोड गाड़ियों की कतार देखी जा सकती है। इससे सड़कें भी तेजी से खराब हो रही हैं और हादसों का खतरा बढ़ रहा है। बावजूद इसके कोई ठोस कार्रवाई सामने नहीं आ रही है।
पुलिस पर उठ रहे सवाल, कार्रवाई में दिख रही नरमी
स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिस की भूमिका भी इस पूरे मामले में संदेह के घेरे में है। आम जनता का आरोप है कि छोटे वाहनों पर तुरंत कार्रवाई करने वाली पुलिस बड़े और प्रभावशाली लोगों से जुड़े डंपरों पर सख्ती नहीं दिखाती। कई बार शिकायतें करने के बावजूद जांच नहीं होना लोगों में असंतोष बढ़ा रहा है। सड़क पर खुलेआम नियमों की अनदेखी के बावजूद पुलिस की चुप्पी सवाल खड़े कर रही है। यदि पुलिस चाहे तो ओवरलोड और बिना रॉयल्टी परिवहन पर तत्काल रोक लगाई जा सकती है। लेकिन लगातार अनदेखी से यह धारणा बन रही है कि कहीं न कहीं सिस्टम में ढिलाई या दबाव काम कर रहा है।
कार्रवाई से बचने के लिए ट्रांसफर का डर बना ढाल
सूत्रों के मुताबिक पुलिस और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच एक तरह का दबाव बना रहता है, जिसके चलते वे नेताओं से जुड़े डंपरों पर कार्रवाई करने से बचते हैं। अधिकारियों को डर रहता है कि अगर उन्होंने सख्ती दिखाई तो उनका ट्रांसफर कर दिया जाएगा। यही वजह है कि नियमों का उल्लंघन करने वाले बेखौफ होकर सड़कों पर दौड़ रहे हैं। कई बार शिकायतें होने के बाद भी कार्रवाई नहीं होने से आम जनता में नाराजगी बढ़ती जा रही है। लोग सवाल उठा रहे हैं कि आखिर कानून सबके लिए बराबर क्यों नहीं है। छोटे वाहन चालकों पर चालानी कार्रवाई करने वाली पुलिस बड़े मामलों में चुप क्यों है।
जांच के नाम पर दिखावा, नेताओं के वाहनों को खुली छूट
क्षेत्र में कभी-कभार चेकिंग अभियान चलाया भी जाता है, लेकिन उसमें भी नेताओं से जुड़े डंपरों को पहले ही सूचना मिल जाती है। ऐसे में जांच सिर्फ औपचारिकता बनकर रह जाती है। आम लोगों का कहना है कि अगर निष्पक्ष जांच हो तो कई बड़े खुलासे हो सकते हैं। बिना रॉयल्टी परिवहन और ओवरलोडिंग के मामलों में सख्त कार्रवाई की जरूरत है। प्रशासन की निष्क्रियता से कानून व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। यदि समय रहते इस पर नियंत्रण नहीं किया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और बिगड़ सकती है। जनता अब इस पूरे मामले में पारदर्शिता और सख्त कदमों की मांग कर रही है।










