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आमला ब्लाक में 56 निजी स्कूल, अधिकतर स्कूलों में नहीं है खेल मैदान कैसे मिल जाती है मान्यता

आमला ब्लाक में 56 निजी स्कूल, अधिकतर स्कूलों में नहीं है खेल मैदान कैसे मिल जाती है मान्यता

आमला. प्राइवेट स्कूलों की फीस आसमान छू रही है। बच्चों को दी जाने वाली सुविधाओं के नाम पर मनमानी फीस वसूल की जा रही है। लेकिन स्कूलों में कागजो में सुविधाए दी जाती है। वैसे तो स्कूलों का निरीक्षण किया जाए तो अधिकतर स्कूलों में छात्र छात्राओं के लिए खेल मैदान ही नही है। जिसके कारण स्कूली छात्र-छात्राओं का शरीरिक ओर मानशिक विकास नही हो पा रहा है।
जानकारी के अनुसार नगर सहित ब्लाक में 56 प्राइवेट स्कूल संचालित हो रहे हैं, लेकिन इनमें से अधिकतर स्कूलों में खेल मैदान नहीं है। यह एक गंभीर मुद्दा है, क्योंकि खेल मैदान की अनुपस्थिति छात्र-छात्राओं के शारीरिक और मानसिक विकास को प्रभावित कर सकती है।शासन द्वारा निजी स्कूल संचालकों को मानकों के आधार पर मान्यता देने का प्रावधान किया है । लेकिन निजी स्कूल संचालक स्कूल के संचालन में मानकों का ध्यान नहीं रखते है।

नियम विरुद्ध संचलित हो रहे प्राइवेट स्कूल

प्राइवेट स्कूलों को मान्यता देने के लिए नियमों का पालन करना आवश्यक है, लेकिन अधिकतर स्कूल नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं। खेल मैदान नही होना एक बड़ा मुद्दा है, जिस पर ध्यान देने की आवश्यकता है।लेकिन इस ओर शिक्षा विभाग के आला अधिकारी सिर्फ मान्यता देने के लिए औपचारिक निरीक्षण करते है। ब्लाक सहित नगर में ऐसे अनेक स्कूल है। जिनके पास खेल मैदान की सुविधाएं नही है। सूत्रों की माने तो नगर में एक स्कूल है। जिनके पास स्कूल अलग स्थान पर संचलित किया जा रहा है, और खेल मैदान दो किलोमीटर की दूरी पर दर्शया गया है। अब सोचने की बात यह है कि स्कुल में खेल पिरेड जब होता है। तो क्या बच्चों को खिलाने के लिए दो किलोमीटर दूर ले जाया जाता है। इसकी जांच भी नही की जा रही है।

प्राइवेट स्कूलों में नहीं है डीएड बीएड शिक्षक

इन प्राइवेट स्कूलों में शिक्षकों की योग्यता भी एक बड़ा मुद्दा है। अधिकतर स्कूलों में डीएड बीएड शिक्षक नहीं हैं, जो छात्र-छात्राओं के भविष्य के लिए चिंता का विषय है। शिक्षा विभाग को हस्तक्षेप करने की आवश्यकता है। विभाग को इन प्राइवेट स्कूलों की जांच करनी चाहिए और नियमों का पालन करने के लिए उन्हें निर्देश देने चाहिए।

छात्र-छात्राओं के भविष्य के लिए शासन को नही है चिंता

इन प्राइवेट स्कूलों में छात्र-छात्राओं के भविष्य के लिए चिंता नही है। शिक्षा विभाग और सरकार को इस मुद्दे पर ध्यान देने की आवश्यकता है लेकिन शिक्षा विभाग के अधिकारी इस ओर ध्यान नही दे रहे है। प्राइवेट स्कूलों को नियमों का पालन नही किया जा रहा है उसके बाद भी सालो से स्कूल संचलित किया जा रहा है।

इनका कहना है……………………………..

9 से 12 तक स्कुलों की मान्यता के लिए हमारे द्वारा अनुसंसा की जाती है स्कूल में खेल मैदान नही होगा तो अनुसंसा नही की जाएगी।

लक्ष्मी नारायण प्रजापति
विकास खंड शिक्षा अधिकारी आमला

प्राइवेट स्कुलो की मान्यता के सम्बंध में अभी स्कूलों का भौतिक सत्यापन किया जा रहा है अगर स्कूल के पास स्वम का खेल ग्राउंड नही पाया जायगा तो स्कूल की मान्यता के लिए अनुसंसा नही की जाएगी

मनीष घोटे
विकास खण्ड स्रोत्र समन्वयक आमला

Ibn 24 Bharat
Author: Ibn 24 Bharat

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