डिप्टी रेंजर पर कार्रवाई की मांग, घटिया निर्माण और राशि दुरुपयोग के लगे आरोप
आमला। ब्लाक के वन ग्राम लादी में वन विभाग का रेस्ट हाउस इन दिनों भ्रष्टाचार और अव्यवस्थाओं को लेकर चर्चाओं में है। विभाग द्वारा करीब 13 लाख रुपए की राशि खर्च कर रेस्ट हाउस का कायाकल्प कराया गया था, लेकिन वर्तमान स्थिति को देखकर ऐसा प्रतीत होता है कि काम केवल कागजों तक ही सीमित रहा। भवन के दरवाजे, खिड़कियां और अन्य निर्माण कार्य अभी भी अधूरे और खराब हालत में दिखाई दे रहे हैं। ग्रामीणों का आरोप है कि निर्माण कार्य में गुणवत्ता का बिल्कुल ध्यान नहीं रखा गया और शासन की राशि का खुलकर दुरुपयोग किया गया। लोगों का कहना है कि इतने बड़े बजट के बाद भी रेस्ट हाउस की हालत बदहाल होना सीधे तौर पर भ्रष्टाचार की ओर इशारा करता है। मामले को लेकर ग्रामीणों ने जिम्मेदार अधिकारियों और विशेष रूप से डिप्टी रेंजर की भूमिका पर सवाल उठाते हुए कार्रवाई की मांग तेज कर दी है।
सीसीएफ के निरीक्षण में भी नहीं दिखी खामियां, अधिकारियों की
कार्यप्रणाली पर उठे सवाल
ग्रामीणों का कहना है कि वन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों द्वारा समय-समय पर निरीक्षण किए गए, लेकिन किसी भी अधिकारी ने निर्माण कार्य की गुणवत्ता और कमियों पर ध्यान नहीं दिया। हाल ही में सीसीएफ स्तर के निरीक्षण के दौरान भी रेस्ट हाउस की वास्तविक स्थिति को नजरअंदाज कर दिया गया, जिससे ग्रामीणों में नाराजगी और बढ़ गई है। लोगों का आरोप है कि विभागीय अधिकारियों की मिलीभगत के कारण भ्रष्टाचार को संरक्षण मिल रहा है। निरीक्षण के दौरान यदि निष्पक्षता से जांच होती तो घटिया निर्माण और अधूरे कार्यों की पोल उसी समय खुल जाती। ग्रामीणों का कहना है कि अधिकारियों की चुप्पी से यह मामला और भी संदेहास्पद बन गया है। अब क्षेत्र में चर्चा है कि आखिर इतने बड़े स्तर की अनियमितताओं के बावजूद जिम्मेदारों पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही।
13 लाख खर्च के बाद भी नहीं सुधरी व्यवस्था, उच्च स्तरीय जांच की मांग तेज
वन ग्राम लादी के लोगों ने पूरे मामले की उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग उठाई है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि निष्पक्ष जांच कराई जाए तो निर्माण कार्य में भारी अनियमितताएं सामने आ सकती हैं। लोगों ने आरोप लगाया कि विभागीय अधिकारियों ने बिना गुणवत्ता जांच के भुगतान कर दिया, जिससे शासन को आर्थिक नुकसान पहुंचा है। ग्रामीणों ने मांग की है कि निर्माण कार्य की तकनीकी जांच कराकर दोषी अधिकारियों और ठेकेदारों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाए। उनका कहना है कि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई तो भविष्य में भी इसी तरह सरकारी योजनाओं और विकास कार्यों में भ्रष्टाचार होता रहेगा। क्षेत्र के लोगों ने शासन और प्रशासन से मांग की है कि जनता के पैसों की बर्बादी रोकने के लिए मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों को जवाबदेह बनाया जाए।










