कलेक्टर के निर्देशों की अनदेखी! आमला की करोड़ों की जमीन पर फिर शुरू हुआ खरीद-फरोख्त का खेल
कलेक्टर ने लगाई थी रोक, एसडीओ ने हटा दी आदेशों की खुलेआम अवहेलना
आमला। कलेक्टर बैतूल द्वारा जनसुनवाई में दिये गए स्पष्ट निर्देशों के बावजूद भी आमला की विवादित भूमि पर खरीद-फरोख्त का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। शिकायतकर्ता शरद जेशवाल ने बताया कि 23 सितंबर 2025 को जनसुनवाई में कलेक्टर ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से एसडीओ राजस्व आमला को मौखिक आदेश दिए थे कि खसरा नंबर 669/1, 669/2, 669/3, 669/4 और 669/5 की भूमि पर तत्काल रोक लगाई जाए। कलेक्टर के इन आदेशों के बाद भी एसडीएम द्वारा 13 अक्टूबर को खसरा नंबर 669/3 और 669/4 की खरीद-बिक्री पर लगी रोक हटा दी गई। इससे यह स्पष्ट होता है कि राजस्व अधिकारियों ने कलेक्टर के निर्देशों को नजरअंदाज कर दिया है। शिकायतकर्ता ने इसे जिला प्रशासन के आदेशों की खुली अवहेलना बताया है। शरद जेशवाल ने एसडीएम से शिकायत कर जमीन की खरीद फरोख्त पर रोक लगाने की मांग की है।

करोड़ों की जमीन का
खेल व्यावसायिक भूमि को दिखाया आवासीय सरकार को लाखों का नुकसान
शिकायतकर्ता शरद जेशवाल के अनुसार, गैरशिकायतकर्तागणों ने आमला की बहुमूल्य व्यावसायिक भूमि को रिश्तेदार पटवारियों की मदद से अवैध तरीके से आवासीय प्रयोजन में डायवर्ट करा लिया। इसके बाद 01 जनवरी 2025 को पांच रजिस्ट्री के माध्यम से भूमि का सौदा कर लिया गया। भूमि मूल रूप से व्यवसायिक उपयोग की थी, लेकिन आवासीय बताकर की गई रजिस्ट्री से शासन को लाखों रुपये की स्टाम्प ड्यूटी का नुकसान हुआ। जांच के बाद जिला पंजीयक ने रजिस्ट्री को अवैध पाया और अतिरिक्त शुल्क वसूली के आदेश जारी किये। शिकायतकर्ता ने बताया कि यह सारा खेल भूमाफिया और भ्रष्ट राजस्व कर्मचारियों की मिलीभगत से किया गया।

23 हजार प्रति वर्गमीटर में हुई सौदेबाजी 27 अक्टूबर को तय सुनवाई की तारीख
शिकायतकर्ता ने अपने आवेदन में खुलासा किया कि खसरा नंबर 669/2 और 669/3 की कुल 0.092 हेक्टेयर भूमि का सौदा 2.20 करोड़ रुपये में किया गया। इस हिसाब से भूमि का बाजार मूल्य 23,913 रुपये प्रति वर्गमीटर बैठता है, जबकि गाइडलाइन दर 16,000 रुपये है। मामले की रिकार्ड दुरुस्ती का प्रकरण वर्तमान में एसडीओ राजस्व आमला के न्यायालय में विचाराधीन है, जिसकी सुनवाई 27 अक्टूबर 2025 को निर्धारित की गई है। शिकायतकर्ता ने आशंका जताई है कि गैरशिकायतकर्तागण सुनवाई से पहले ही भूमि को बेचकर साक्ष्य मिटा सकते हैं। इसलिए उसने मांग की है कि कलेक्टर बैतूल अपने पूर्व आदेशों का पालन सुनिश्चित कराते हुए सभी संबंधित खसरा नंबरों पर तत्काल खरीद-बिक्री पर रोक लगाएं।
इनका कहना है
भमि की रजिस्ट्री के विषय मे शिकायत हुई थी अधिरोपित की राशि जमा हुई है 10 लाख की राशि जमा की गई है 3 लोगो के खसरे पर रोक लगी हुई है।
शैलेंद्र बडोनिया एसडीएम मामला










