जिले में चल रहा जुआ के बड़े फड़, पड़ोसी जिले से आ रहे जुआरी, रोजाना लग रहे 50 लाख के दांव
जिले के ग्रामीण इलाके में जगह-जगह फड़ सज गए हैं। शहर में जुए की तमाम नई फड़ लग गई है। पेशेवर जुआरी लाखों रुपए दांव पर लगा रहे हैं। शहर के पुल पुलियों खेतो में ग्रामीण इलाके मे फॉर्म हाउस, जंगल में जुआ के फड़ लग रहे हैं।
बैतुल. ग्रामीण इलाके में जगह-जगह फड़ सज गए हैं। जिले की कई जगहों में जुए की तमाम नई फड़ लग गई है। पेशेवर जुआरी लाखों रुपए दांव पर लगा रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्र के खेत और पुल पुलियो के आस-पास इलाको में जुआ के फड़ लग रहे हैं। पुलिस की कार्रवाई न होने से सबसे सुरक्षित जुआ फड़ के लिए बैतुल जिला माना जाता हैं, यही वजह है कि नागपुर, जुनारदेव, महाराष्ट्र,छिंदवाड़ा,अमरावती तक के जुआरी लाखों के दांव लगाने बैतुल की फड़ों पर आ रहे हैं। इन फड़ो पर रोजाना करीब 30 लाख के दांव लगाए जा रहे हैं। सूत्रों के अनुसार केवल बड़े फड़ों पर ही 20 लाख का रोजाना जुआ खेला जा रहा है। वहीं छोटे-छोटे अड्डो पर भी कुल मिलाकर 10 लाख तक के दांव लगाए जा रहे हैं।
बैतुल जिले में आधा दर्जन फड़ों पर चल रहा जुआ………………..
बैतुल पट्टन,ताइखेड़ा सालबर्डी कामत दुनावा मसौद, गोनापुर,आठनेर झल्लार में(कल्लू) के खेत में जुआ की फड़ लग रही है। इन फड़ों पर न केवल शहर के जुआरी बल्कि दूसरे जिलों के जुआरी दांव लगाने आ रहे हैं। इसके अलावा शहर के नामचीन लोग भी अपने एक खास जगह पर जुआ की फड़ लगा रहे हैं। पट्टन में (पिंटू) झल्लार, में (कल्लू) के जुआ दो बड़े फड़ संचालित किए जा रहे हैं। इन दोनों फड़ों पर दिन रात जुआ के दांव लगने पर भी पुलिस द्वारा कार्रवाई न होने से पुलिस की भूमिका पर सवाल उठ रहे हैं।
महाराष्ट्र, जुनारदेव,छिन्दवाड़ा से आ रहे जुआरी……………
पट्टन,ओर झल्लार के इलाके में भी एक दो से ज्यादा जुआ के स्थानों फड़ संचालित हैं। कुछ खेतों व जंगल में जमाए जा रहे हैं।जुआ माफिया द्वारा जुआ की फड़ को संचालित करने का नेटवर्क तैयार किया गया है। इस काम में एक दर्जन से अधिक बेरोजगार युवाओं की 500 रुपएप रोज पर सेवाएं ली जाती हैं। अलग-अलग स्थानों से जुआ माफिया द्वारा खिलाडिय़ों को बाइक पर बैठाकर जुआ संचालित होने वाले स्थान तक पहुंचाया जाता है। फिर यही बेरोजगार युवकों को उन रास्तों पर साधारण तौर पर बैठा दिया जाता है कि अगर इस क्षेत्र से कोई भी संदिग्ध वाहन आता दिखाई दे। तो वह तुरंत फोन पर सूचना दें, जिससे खिलाडिय़ों को पुलिस से पूर्ण सुरक्षा प्रदान की जाती है।
फड़ पर उपलब्ध होती है सभी सुविधाएं………….
जुआ स्थल पर जुआरियों के लिए शराब, सिगरेट, पानी और खाने का सामान भी उपलब्ध रहता है। अगर कोई खिलाड़ी जुआ में हार रहा है और उसे तुरंत फायनेंस चाहिए तो 10 हजार रुपए पर एक हजार रुपए काटकर 9 हजार रुपए एक दिन के लिए फायनेंस होता है। अब वह जितने दिन बाद पैसे देगा उसे 10 हजार पर एक हजार रुपए प्रतिदिन ब्याज देना होगा। इसके लिए जुआ जीतने वाले जुआरी को अलग से धन राशि संचालकों को देनी होती है।
मिला जुलकर होता है काम……….
बड़े फड़ों पर पुलिस कार्रवाई न करें, इसके लिए जुआ माफिया पहले थाना के स्टाफ को सेट कर लेता है। उसके वाबजूद पुलिस की दूसरी टीम कार्रवाई न कर दे, इसलिए फड़ संचालन में लड़को को तैनात किया जाता है। फड़ संचालक मामूली पढ़े-लिखे और बेरोजगार युवकों को इस काम में लगाते हैं। उन्हें पगार के साथ मोबाइल फोन भी उपलब्ध कराते हैं। यह तक फड़ से काफी दूर उस मार्ग पर कहीं अड्डा जमा लेते हैं जहां से फड़ तक पुलिस के पहुंचने का अंदेशा होता है। पुलिस वाहन आता देख मोबाइल फोन के जरिए फड़ संचालक को सूचना दे देते हैं। नतीजे में जब तक पुलिस फड़ तक पहुंची है तब तक वहां सब कुछ सिमट चुका होता है। लेकिन जिले के सभी थानों में सूचनासंकलनकर्ता भी जुआ चलने की जानकारी अपने विभाग से छुपा रहे है।
Author: Ibn 24 Bharat
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