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वन परिक्षेत्र कार्यालय भवन निर्माण में धांधली का आरोप, घटिया सामग्री से उठ रही गुणवत्ता पर सवाल

वन परिक्षेत्र कार्यालय भवन निर्माण में धांधली का आरोप, घटिया सामग्री से उठ रही गुणवत्ता पर सवाल

25 लाख की लागत, लेकिन निर्माण में फ्लाई ऐश ईंट की गुणवत्ता संदिग्ध

आमला। वन परिक्षेत्र कार्यालय परिसर में नए भवन का निर्माण वन विभाग द्वारा कराया जा रहा है। इस भवन की अनुमानित लागत करीब 25 लाख रुपए बताई जा रही है। निर्माण कार्य शुरू होते ही उसकी गुणवत्ता को लेकर सवाल खड़े होने लगे हैं। आरोप है कि भवन निर्माण में घटिया क्वालिटी की फ्लाई ऐश ईंटों का उपयोग किया जा रहा है। निर्माण स्थल पर काम कर रहे कारीगरों का कहना है कि इस्तेमाल की जा रही ईंटें मानक के अनुरूप नहीं हैं। इससे भवन की मजबूती पर सीधा असर पड़ सकता है। यदि शुरुआत से ही गुणवत्ता से समझौता किया गया तो सरकारी धन की बर्बादी तय मानी जा रही है। जनसेवा कल्याण समिति के उपाध्यक्ष अनिल सोनपुरे ने जाच कराए जाने की मांग सीसीएफ से की है। अनिल सोनपुरे ने कहा कि 25 लाख की लागत से भवन निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया जा रहा है इसकी जाच होना चाहिए।

लोकल रेत का उपयोग, राजमिस्त्री ने नाम न छापने की शर्त पर खोली पोल

निर्माण कार्य में लगी सामग्री को लेकर एक राजमिस्त्री ने नाम न छापने की शर्त पर कई चौंकाने वाले खुलासे किए हैं। राजमिस्त्री के अनुसार भवन निर्माण में लोकल रेत का इस्तेमाल किया जा रहा है, जो गुणवत्ता मानकों पर खरी नहीं उतरती। उन्होंने बताया कि घटिया फ्लाई ऐश ईंटों के साथ कमजोर रेत का प्रयोग भविष्य में भवन के लिए खतरनाक साबित हो सकता है। ऐसे निर्माण से भवन में दरारें आने और प्लास्टर उखड़ने की आशंका बनी रहती है। नियमों के अनुसार निर्माण में प्रमाणित सामग्री का उपयोग अनिवार्य होता है। लेकिन यहां नियमों की अनदेखी खुलेआम की जा रही है। इससे विभागीय निगरानी पर भी सवाल उठ रहे हैं।

सीसीएफ से जांच की मांग, जल्द खस्ताहाल होने का खतरा

स्थानीय युवा महेंद्र सूर्यवंशी ने इस मामले में गंभीर आरोप लगाते हुए सीसीएफ से जांच की मांग की है। उनका कहना है कि यदि इसी तरह घटिया सामग्री से भवन का निर्माण किया गया तो कुछ ही वर्षों में यह खस्ताहाल हो जाएगा। उन्होंने आशंका जताई कि भवन की मरम्मत पर दोबारा लाखों रुपए खर्च करने पड़ सकते हैं। यह सीधे-सीधे सरकारी धन का दुरुपयोग होगा। उन्होंने मांग की है कि निर्माण कार्य की गुणवत्ता की तत्काल जांच कराई जाए। साथ ही दोषी अधिकारियों और ठेकेदार पर कार्रवाई होनी चाहिए। अब देखना होगा कि वन विभाग इस शिकायत को कितनी गंभीरता से लेता है।

इनका कहना है

भवन निर्माण के लिए बैतूल से टेंडर होते है ठेकेदार द्वारा मटीरियल डाला जा रहा है अगर क्वालिटी ठीक नही है तो उसको बदला दिया जाएगा।

नानकराम कुशवाह रेंजर वन परिक्षेत्र अधिकारी आमला

Ibn 24 Bharat
Author: Ibn 24 Bharat

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