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मुख्यमंत्री कन्या विवाह में महिला जनप्रतिनिधि को किया दरकिनार

आमला। ग्राम पंचायत देवगांव में आयोजित मुख्यमंत्री कन्याविवाह योजना के सामुहिक समारोह में महिला जनप्रतिनिधियों को दरकिनार किया गया है। इस आयोजन में जनपद अध्यक्ष और उपाध्यक्ष, जो दोनों पुरुष हैं, के नामों को समिति में रखा गया है, जबकि महिला सरपंच, पंच, जनपद सदस्य महिलाओं को समिति से नदारद रखा गया है।

महिलाओं का अपमान

इस आयोजन में महिला जनप्रतिनिधियों का अपमान किया गया है। महिला सरपंच, पंच, जनपद सदस्य महिलाओं को समिति में नहीं रखना उनके साथ भेदभाव करने जैसा है। इससे वे अपमानित महसूस कर रही हैं।इस आयोजन में महिला जनप्रतिनिधियों को दरकिनार करने से सवाल उठने लगे हैं। क्या महिलाओं को उनके अधिकारों से वंचित किया जा रहा है? क्या महिलाओं को समान अवसर नहीं दिए जा रहे हैं?

महिलाओं को मिलना चाहिए सम्मान

महिला जनप्रतिनिधियों को सम्मान और समान अवसर मिलना चाहिए। उन्हें समिति में शामिल करना और उनके नामों को आयोजन में शामिल करना आवश्यक है। इससे महिलाओं को अपने अधिकारों का उपयोग करने का अवसर मिलेगा और वे अपने क्षेत्र के विकास में योगदान कर सकेंगी। प्रशासन को चाहिए कि वह इस मामले में कार्रवाई करे और महिला जनप्रतिनिधियों को सम्मान और समान अवसर दिलाने के लिए कदम उठाए। इससे महिलाओं को अपने अधिकारों का उपयोग करने का अवसर मिलेगा और वे अपने क्षेत्र के विकास में योगदान कर सकेंगी।

इनका कहना है

मुख्यमंत्री कन्याविवाह योजना की समिति जिले से बनी है। समिति के गठन में जनपद का कोई हस्तक्षेप नहीं है। विवाह कार्यक्रम किसी भी पंचायत में किया जा सकता था जहां उपयुक्त स्थान मिला वहां के जनप्रतिनिधि को कार्यक्रम की तैयारी करना है। समिति में नाम नहीं होना कोई इश्यू नहीं है।

संजीत श्रीवास्तव सीईओ आमला।

भाजपा की सरकार को महिला सशक्तीकरण को बढ़ावा देना चाहिए महिलाओ का समान करना चाहिए विवाह कार्यक्रम में महिलाओं का अपमान निराशाजनक है जिस कार्यक्रम में महिलाओं का समान नही किया जाता ऐसे कार्यक्रमों की हम घोर निदा करते है।

खुशबू अतुलकर कांग्रेस पार्षद वार्ड क्रमांक 9

Ibn 24 Bharat
Author: Ibn 24 Bharat

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